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रवीश कुमार: ‘फर्जी कंपनियों का बहीखाता लेकर जीडीपी बढ़ाने का खेल पकड़ा गया’

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Fake GDP Shell companies NSSO

Fake GDP Shell companies NSSO

जीडीपी का आँकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताने के लिए फ़र्ज़ी कंपनियों का इस्तमाल किया गया है। नेशनल सैंपल सर्वे (NSSO) ने एक साल लगाकर एक सर्वे किया मगर उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। पहली बार सर्विस सेक्टर की कंपनियों का सर्वे हो रहा था। इसके लिए NSSO ने कारपोरेट मंत्रालय से सर्विस सेक्टर की कंपनियों का डेटा लिया। जब उन कंपनियों का पता लगाने गए तो मालूम ही नहीं चल पाया।15 प्रतिशत कंपनियाँ ऐसी थीं जो लापता थीं। 21 प्रतिशत कंपनियाँ ऐसी निकलीं जिनका पता तो था मगर बंद हो चुकी थीं। क़रीब 36 प्रतिशत ऐसी फ़र्ज़ी कंपनियों का इस्तमाल कर भारत सरकार ने जी डी पी के आँकड़े को चमकाया है। मेरे हिसाब से भारत की जनता को उल्लू बनाया है। जब सर्वे रिपोर्ट में पोल खुली तो रिपोर्ट दबा दी गई।
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आप जानते हैं कि 2015 में जी डी पी आँकने की पद्धति को बदल दिया गया। उस वक्त भी इस क्षेत्र के जानकारों ने सवाल उठाए। एन नागराज ने कहा कि जी डी पी जोड़ने के लिए कारपोरेट मंत्रालय से जिन कंपनियों का बहीखाता लिया गया है, वे सही हैं या नहीं इसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। नागराज ने फिर से यह माँग की है। एन नागराज मुंबई स्थित इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट में सांख्यिकीय विद्वान हैं। वे चाहते हैं कि राष्ट्रीय बहीखाते( जी डी पी) में इन आँकड़ों का इस्तमाल करने से पहले कारपोरेट मंत्रालय के डेटा को रिसर्चर के हवाले किया जाए ताकि वे सत्यता की जाँच कर सके।

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