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आजादी का गुमनाम सिपाही ‘शेर अली अफ़रीदी’, जो आज ही देश के लिए झूला था फांसी पर

Freedom Fighter sher ali afridi
Freedom Fighter sher ali afridi

आज के रोज़ ही 11 मार्च 1872 को “शेर अली अफ़रीदी” को भारत के सबसे बड़े अंग्रेज़ अफ़सर “वाईसराय लार्ड मायो” के क़त्ल के जुर्म में फांसी पर लटका दिया गया था।

ये तस्वीर उसी अज़ीम मोजाहिद-ए-आज़ादी शेर अली आफरीदी की हैं जिन्होंने उस वक़्त भारत के वाइसराय लार्ड मायो को कत्ल किया था..। याद रहे की उस समय वाइसराय की हैसियत एक राष्ट्रपति जैसी होती थी वो पूरे मुल्क का एक तरह हुक्मरान होता था जो सिर्फ़ ब्रिटेन की महरानी के मातहत काम करता था…।

एक छोटा सा गांव जमरूद (आफ्गानिस्तान से सटे) का रहने वाला बहादुर इंसान जिसका नाम शेर अली ख़ान था जिन्हें 30 साल की उम्र में ही काले पानी की सज़ा हुई…।

जुर्म सिर्फ़ यह था कि देश की आज़ादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ़ बागवात की, और भारत के इतिहास के सुनहरे पन्नो में वह पहला व्यक्ति था जिसने किसी गवर्नर जनरल को मौत के घाट पहुचाया अर्थात उस वक़्त के Lord Mayo को इतना ज़ख्मी किया की कोलकात्ता आते आते उसकी मौत हो गयी…।

2 april 1767 को Colonel Pollock, Commissioner of Peshawar ने काला पानी का फ़ैसला सुनाया था…।

देश को अंग्रेजों से छुटकारा दिलाने और यहां से खदेड़ने के लिए एक नायाब तरीका अपनाया, मकसद सिर्फ़ यह था अंग्रेजों भारत छोड़ो, कराची और मुंबई होते हुए उनको अंडमान की जेल (1869 ) में पहुँचा दिया गया था…।

वहाँ पर नाई बन कर जिंदगी गुजारने लगे और उस पल का इन्तेज़ार करने लगे कि कब यहाँ पर लॉर्ड मायो का आना है ताकि में उसका वध कर सकुँ और भारत का अंग्रेज़ों से छुटकारा मिल सके, उन्हें अच्छी तरह मालूम था अगर मैं नाई का काम करूँगा तो अंग्रेजों के करीब जाने का मौका मिल सकेगा और मेरे उपर अंग्रेज़ो का शक नही होगा, उस समय भारत के वाइसराय लार्ड मायो को कत्ल किया था याद रहे की उस समय वाइसराय की हैसियत एक राष्ट्रपति जैसी होती थी वो पुरे मुल्क का एक तरह हुक्मरान होता था जो सिर्फ़ ब्रिटेन की महरानी के मातहत काम करता था…।

1869 से इन्तेज़ार करते करते वह वक़्त भी आया जब Lord Mayo Feb 8 1872 को अंडमान निकोबार पहुँचा, Hope Town नाम के जजीरे के पास जाकर वह छुप गये और उसी के पास से Lord Mayo का गुजर हुवा और पल भर गवाए बिना उन्होेंने देश पर ज़ुल्म करने वाले गवर्नर जनरल को अपने चाकू का निशाना इस तरह बनाया कि समुद्र के पानी में गिर गया जिसको इलाज के लिये कोलकात्ता लाते लाते मृत्यु हो गयी…।

उनसे जब पूछा गया कि आपने ने लॉर्ड मायो को क्यों मारा? , देश का बहादुर यो जवाब दिया ” he had done it on orders from God. Then he was asked, if there was any co-conspirator. He said: ‘Yes, God is the co-conspirator.’”

और Mar 11 1872 को जब सूली को हँसते हँसते चूमा, भारतीय जेल कर्मी को मुखातिब करते हुए उनके ज़ुबान पर ये शब्द मौजूद थे “‘Brothers! I have killed your enemy and you are a witness that I am a Muslim.’ And then he breathed his last while reciting Kalima.”

सभी जानते है अंग्रेजों ने 1857 के प्रथम स्वटतन्त्रा के आज़ादी विफल होने पर खास तौर से मुस्लिम जनता को निशाना बनाया था और इसका ताज़ा सबूत अंडमान और निकोबार है जहा अभी हाल ही के वर्षो में सबसे ज़्यादा आबादी वाहा मुस्लिम की थी… क्योंकि जब देश के हर कोने से मुस्लिम उल्मा रेशमी रुमाल आंदोलन इत्यादि और लोगों को काला पानी दिया जाता तो अंडमान निकोबार भेज दिया जाता और वह लोग भी अपना तक़दीर समझ कर वही बस गये और शादी व्याह करके वही जिंदगी काटने लगे और इस इन्तेज़ार मे लगे रहे की हम लोगो की क़ुर्बानी बेकार नही जाएगी और इंशालहा एक दिन अपना देश आज़ाद होगा तो हम लोग फिर अपने घरो को लौटेगे…।

इस तरह काला पानी की सज़ा पाने वाले सबसे ज़्यादा अनुपात मुस्लिमों का ही था और सारा अंडमान और निकोबार मुस्लिमों से पॅट गया था…। आज़ादी के बाद सरकार ने लोगों को नौकरी इत्यादि का लालच देकर तमिलनाडु और अन्य राज्यों से लोगों को बुलाकर वहाँ बसाया, इस तरह अब फिलहाल मुस्लिम की अनुपात कम हो गयी है…।

ऐसे गुमनाम शहीदों को श्रधंजलि देने वाले आज बहुत कम हैं, मगर जिन्होनें देश के लिए अपनी जान की आहुति दे दी उनको अपना मक़सद प्यारा था ना की नाम और शोहरत…।

साभार: इंडियन मुस्लिम

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