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‘शहीद पीर अली खां’ – भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम 1857 के गुमनाम पीर

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Shaheed Peer ali Khan

Shaheed Peer ali Khan

फिर वह दिन भी आया जिसके लिए पीर अली के नेतृत्व में आजादी के सैकड़ों दीवाने एक अरसे से तैयारी कर रहे थे। पूर्व योजना के अनुसार 3 जुलाई, 1857 को पीर अली के घर पर दो सौ से ज्यादा हथियारबंद युवा इकट्‌ठे हुए। देश की आजादी के लिए कुर्बानी की कसमें खाने के बाद पीर अली की अगुवाई में उन्होंने पटना के गुलज़ार बाग स्थित अंग्रेजों के प्रशासनिक भवन को घेर लिया। यह वही भवन था जहां से प्रदेश की क्रांतिकारी गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी और उनपर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार होती थी। वहाँ तैनात डॉ. लॉयल ने क्रांतिकारियों की उग्र भीड़ पर गोली चलवा दी। अंग्रेजी सिपाहियों की फायरिंग का जवाब क्रांतिकारी युवाओं की टोली ने भी फायरिंग से दिया। इस दोतरफा गोलीबारी में डॉ. लॉयल और कुछ सिपाहियों के अलावा कई क्रांतिकारी युवा मौके पर शहीद हुए और दर्जनों दूसरे घायल होकर अस्पताल पहुंच गए। पीर अली और उनके कुछ साथी चौतरफा फायरिंग के बीच घटना-स्थल से बच निकलने में सफल हुए।
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