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त्रिशंकु लोकसभा में विपक्ष की पहली बाजी होगी स्पीकर का चुनाव: Prashant Tandon

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Trishanku sarkar Loksabha 2019

Trishanku sarkar Loksabha 2019

पांच चरण के चुनाव के बाद रुझान और ज़्यादातर विश्लेषण बता रहे हैं कि एनडीए और यूपीए दोनों ही अपनी संख्या के दम पर बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल नहीं होंगे. ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति और लोकसभा के स्पीकर दोनों की ही भूमिका सबसे अहम होगी. त्रिशंकु लोकसभा में असली किंग मेकर क्षेत्रीय पार्टियां होंगी जो एनडीए और यूपीए के बाहर हैं. इनमे प्रमुख हैं उत्तर प्रदेश का एसपी – बीएसपी गठबंधन, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, चन्द्रबाबू नायडू की तेलुगू देसम, जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, नवीन पटनायक की बीजेडी. ये ब्लॉक इतना बड़ा होगा कि दोनों में से किसी भी गठबंधन की 200 सीटें मिलने पर भी बहुमत का आंकड़ा पार लगा देगा.
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पहली संभावना:  एनडीए अगर 200 या उससे कुछ उपर रहती है और सबसे बड़े चुनाव पूर्व गठबंधन के रूप में उभरती है तब राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने और सदन में बहुमत सिद्ध करने का न्योता दे सकते हैं. (एनडीए के अंदर मोदी के संसदीय दल का नेता चुने जाने में दिक्कत नहीं आयेगी) हालांकि जिस वक़्त राष्ट्रपति ये फैसला कर रहे होंगे उस वक़्त उनके पास दूसरे विकल्प और क्षेत्रीय पार्टियों के समर्थन पत्र पहुंच चुके होंगे जिसकी संख्या एनडीए से ज्यादा होगी. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से अपेक्षा है कि वो स्थिर सरकार की अवधारणा, बोम्मई केस की गाइडलाइन और स्वास्थ्य परंपराओं का निर्वाह करेंगे. लेकिन जिस तरह मोदी के शासनकाल में उच्च संवैधानिक संस्थाओं में गिरावट आई है उससे इस आशंका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि राष्ट्रपति नियमों और परंपराओं को दरकिनार कर मोदी को सरकार बनाने का न्योता देने की गुंजाइश तलाशेंगे.

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